एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम में बोले RSS प्रान्त प्रचारक मुरलीधर - "संस्कृति का संरक्षण और राष्ट्र सेवा ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि".

बूँदी के नैनवा मार्ग पर स्थित शिवम् गार्डन मे 'एक शाम शहीदों के नाम' देशभक्ति कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चित्तौड़ प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी उपस्थित रहे, जबकि सह क्षेत्र कार्यवाह गेंदालाल जी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने ओजस्वी बौद्धिक सम्बोधन में प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी ने स्वाधीनता संग्राम के महान बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि हमें देश की स्वतंत्रता के इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में समझना होगा। उन्होंने कहा कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, महारानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के अद्वितीय बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। रामप्रसाद बिस्मिल के देशभक्तिपूर्ण प्रसंग का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे उच्च एवं क्रान्तिकारी विचारों के कारण ही भारत विश्वगुरु बना था।

गुलामी की मानसिकता से मुक्ति आवश्यक


मुरलीधर जी ने समाज में व्याप्त औपनिवेशिक मानसिकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा के शब्दों का अत्यधिक उपयोग, अंग्रेजी पद्धति से जन्मदिन मनाना तथा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करने को शान समझना वास्तव में गुलामी की मानसिकता के प्रतीक हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना होगा और भारतीय परंपराओं व अपनी संस्कृति के अनुसार जीवनशैली अपनानी होगी।

विभाजन का दर्द और भारत का सामर्थ्य


14 अगस्त के विभाजन के दर्दनाक क्षणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय हुए भीषण रक्तपात और सिंध-कराची से पलायन करने वाले करोड़ों लोगों के विस्थापन के इतिहास को हमें विस्मृत नहीं करना चाहिए। अखंड भारत का क्षेत्रफल घटने पर विचार करने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आज का भारत वैश्विक पटल पर अपना डंका बजा रहा है। प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी से लेकर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने तक, भारत हर क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

दैनिक जीवन में राष्ट्रभक्ति अपनाने का संदेश


श्री मुरलीधर जी ने कहा कि केवल सीमाओं पर लड़ना ही देशभक्ति नहीं है, बल्कि देश के लिए जीना और दैनिक कार्यों में राष्ट्रहित सर्वोपरि रखना ही वास्तविक भारत भक्ति है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि: पानी और बिजली की बचत करें।अपने हस्ताक्षर हिंदी व मातृभाषा में करने का संकल्प लें। अपने जन्मदिन और त्यौहार अपनी सनातन संस्कृति के अनुसार मनाएँ।कार्यक्रम के अंत में शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
 

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