मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जालबांधा और सलोनी के आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण

मंत्री ने बच्चों की सीखने की गतिविधियां देखीं, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन कराया

 

खैरागढ़, 11 सितंबर 2026।
बच्चों की मुस्कान, खेल-खेल में सीखने की गतिविधियां और पोषण का संदेश—खैरागढ़ जिले के जालबांधा और सलोनी के आंगनबाड़ी केंद्रों में शुक्रवार को यही तस्वीर नजर आई। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दोनों केंद्रों का निरीक्षण कर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।बच्चों के बीच पहुंचीं लक्ष्मी राजवाड़े ने उनसे बातचीत की और उनकी सीखने की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बच्चों के उत्साह और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि बच्चों को पढ़ाने के लिए खेल-खेल में सीखने और गतिविधि आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण

आंगनबाड़ी से मजबूत होगी भविष्य की नींव

जालबांधा और सलोनी के आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा यानी ईसीसीई गतिविधियों का भी अवलोकन किया गया। मंत्री ने बच्चों की आयु के अनुरूप सीखने का माहौल तैयार करने और केंद्रों को बच्चों के लिए अधिक सहज एवं अनुकूल बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास की बुनियाद शुरुआती वर्षों में ही तैयार होती है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण उपलब्ध कराने के स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की पहली पाठशाला भी हैं।

गोदभराई से अन्नप्राशन तक, पोषण का संकल्प

जालबांधा आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में आयोजित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह कार्यक्रम में लक्ष्मी राजवाड़े भी शामिल हुईं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म में हिस्सा लिया और उन्हें सुपोषण किट वितरित किए। बच्चों का अन्नप्राशन कराते हुए उनके स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस दौरान सक्षम योजना के तहत दो महिलाओं को ऋण सहायता के चेक भी प्रदान किए गए।

मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी केंद्रों का किया निरीक्षण

मां का पोषण, बच्चे की मजबूत नींव

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण से लड़ाई बच्चे के जन्म के बाद नहीं, बल्कि गर्भावस्था से ही शुरू होनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के साथ बच्चों के भोजन में प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करना जरूरी है।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने, उनसे बातचीत करने और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाने की अपील की। उनका कहना था कि बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए पौष्टिक भोजन के साथ परिवार का समय और संवाद भी उतना ही जरूरी है।

‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ बने जनआंदोलन

9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पोषण का संदेश हर परिवार तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मुनगा, हरी सब्जियों और स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बच्चों के भोजन का हिस्सा बनाया जाए। महिलाओं से स्वयं पोषण के प्रति जागरूक होने और परिवार तथा आसपास की महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई।

स्वस्थ मां से स्वस्थ समाज की ओर

पोषण अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया। लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे की पहली आधारशिला है और स्वस्थ बच्चे सशक्त समाज की नींव रखते हैं।

आगामी तीज पर्व के अवसर पर भी पोषण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह सहित जनप्रतिनिधि, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं, गर्भवती महिलाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं।

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