रथयात्रा के दौरान सेवा कार्य में जुटे रहे 1800 स्वयंसेवक

विश्व प्रसिद्ध महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान हर वर्ष की भांति इस बार भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक सेवा व सहयोग कार्य में जुटे रहे। रथयात्रा के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग किया। अन्न सेवा, जल सेवा, औषधी वितरण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, यातायात सहित अन्य सेवाओं में लगभग 1800 स्वयंसेवक सेवारत रहे।

महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान एम्बुलेंस कॉरिडर की व्यवस्था में 600 स्वयंसेवक, स्वच्छता कार्य में 400 स्वयंसेवक, दो एम्बुलेंस सेवा में 40 स्वयंसेवक, पेयजल सेवा 10 स्थान पर 50 स्वयंसेवक, रथयात्रा के दौरान जल छिड़काव हेतु 10 स्थानों पर 50 स्वयंसेवक और मोबाइल मरीज़ सेवा कार्य 2 मेडिकल में 200 स्वयंसेवक सक्रिय रहे। इसके अतिरिक्त 4 डॉक्टर, 2 कंपाउंडर और 4 सहयोगी मरीज़ सेवा कार्य में लगे हुए थे। बीमार हुए श्रद्धालुओं 10 स्ट्रेचर की व्यवस्था 80 स्वयंसेवक संभाल रहे थे।

रथयात्रा से पूर्व सेवा कार्य के उद्घाटन सत्र में बिघन गोपाल जी, ओडिशा पूर्व प्रांत संघचालक समीर महांती जी, क्षेत्र सेवा प्रमुख दीपक राउत जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बारिश भी नहीं रोक पाई भक्तों का उत्साह, रथयात्रा में पहुंचे लाखों श्रद्धालु

पुरी में महाप्रभु श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को घोष यात्रा, आडपमंडप यात्रा, नव दिवसीय यात्रा, गुण्डिचा यात्रा, पतित पावन यात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह संपूर्ण विश्व में एक ऐसी यात्रा है, जहां भक्तों को दर्शन देने के लिए अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड नायक भगवान जगन्नाथ अपना रत्न सिंहासन छोड़कर बाहर आते हैं। रथयात्रा के दिन पुरी में लाखों की संख्या में भक्त और श्रद्धालुओं जुटते हैं।

सर्वप्रथम महाप्रभु के पूजा उपचार के उपरांत पहण्डी (पदहुंडन) के माध्यम से तीनों विषयों को प्रथम रोड किया जाता है। सबसे पहले सुदर्शन जी की पहण्डी, उसके बाद बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में महाप्रभु जगन्नाथ जी पदहुंडन भरते हुए श्री मंदिर से बाहर आते हैं। विग्रहों को रथारूढ़ करने के बाद पारंपरिक ढंग से पुरी के गजपति महाराज द्वारा रथ बुहारना कार्य किया गया, जिसे स्थानीय भाषा में छेरा पहारा कहा जाता है। इसके बाद शाम को 5:00 बजे रथों को खींचते हुए मौसी मां मंदिर की तरफ ले जाया गया।

बुधवार रात से हो रही बारिश के कारण संभावना की जा रही थी कि रथयात्रा के दौरान भक्तों की संख्या कम रह सकती है। लेकिन बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पाई, भारी बारिश के बावजूद लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे और घंटों खड़े रहकर अपने आराध्य का दर्शन किया।

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