पराक्रम, त्याग और ज्ञान के समन्वय से ही युवा शक्ति निर्भय बन सकती है – बी. आर. शंकरानन्द जी

नागपुर।

कमिंस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन में भारतीय शिक्षण मंडल अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानन्द जी ने भारत की पहचान, निर्भयता, मानसिक एकाग्रता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विचार रखे।

उन्होंने कहा कि भारत तीन प्रमुख गुणों – पराक्रम, त्याग और ज्ञान, के लिए जाना जाता है। यही तीनों गुण भारतीय जीवन-दृष्टि और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति के आधार हैं। भारत को “मृत्युंजय भारत” बताते हुए कहा कि भारतीय समाज मृत्यु से भयभीत होने वाला नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वह साहसपूर्वक चुनौतियों का सामना करता है। इसलिए जीवन में निर्भयता का होना आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्भयता का अर्थ घमंड या आक्रामकता नहीं, बल्कि मन की गहरी शांति है। यह आंतरिक शांति तभी प्राप्त होती है, जब व्यक्ति अपने मन को एकाग्र और संयमित करना सीखता है। एकाग्र मन ही सही निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की शक्ति देता है।

युवाओं के लिए प्रेरक संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण करने वाला युवा ऐसा हो जो “न रुकने वाला, न थकने वाला, न झुकने वाला और न बिकने वाला” हो। पराक्रम, त्याग और ज्ञान के समन्वय से ही युवाशक्ति निर्भय बन सकती है, जो एक समर्थ, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव है।

 


 

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