विष्णुदेव साय सरकार; जमीन के कागजों पर महिलाओं का बढ़ता अधिकार

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  • Sep 03, 2026
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छत्तीसगढ़ में महिला स्वामित्व को प्रोत्साहन: पंजीयन शुल्क 4 से घटकर 2 प्रतिशत, रायगढ़ की शर्मिला मिश्रा ने बचाए करीब 25 हजार रुपये

 

 3 सितंबर 2026

किसी महिला के नाम दर्ज जमीन का एक टुकड़ा सिर्फ संपत्ति नहीं होता। वह उसके आर्थिक आत्मविश्वास, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की मजबूती का आधार भी बन सकता है। यही कारण है कि महिलाओं को संपत्ति का स्वामित्व दिलाने वाली नीतियां केवल आर्थिक फैसले नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में उठाए गए कदम भी मानी जाती हैं।

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नाम अचल संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी है। इस निर्णय के बाद महिलाओं के पक्ष में जमीन और अन्य अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत हो गया है।

इसका सीधा लाभ अब महिलाओं को मिलना शुरू हो गया है।

एक रजिस्ट्री, करीब 25 हजार रुपये की बचत

रायगढ़ की श्रीमती शर्मिला मिश्रा इस पहल का प्रत्यक्ष लाभ पाने वाली महिलाओं में शामिल हैं। उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराई। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें करीब 25 हजार रुपये की बचत हुई।

शर्मिला मिश्रा के लिए यह राहत केवल रजिस्ट्री के खर्च में कमी नहीं है। उनके अनुसार, महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहित करने का यह निर्णय उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

छूट का गणित, अधिकार का बड़ा अर्थ

सरकार के निर्णय को सरल शब्दों में समझें तो महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन कराने पर पहले जहां बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत पंजीयन शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब यह शुल्क 2 प्रतिशत है।

यानी संपत्ति के पंजीयन की लागत में सीधे आधी कमी।

लेकिन इस फैसले का महत्व केवल इतनी बचत तक सीमित नहीं है। संपत्ति के स्वामित्व में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाना आर्थिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार है। जमीन या मकान महिला के नाम होने से उसके पास ऐसी संपत्ति होती है, जो आवश्यकता के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

महिला सशक्तीकरण का एक ठोस आधार—संपत्ति का स्वामित्व

महिला सशक्तीकरण की चर्चा प्रायः शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और वित्तीय स्वतंत्रता के संदर्भ में होती है। लेकिन इन सभी के साथ संपत्ति का स्वामित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

जिस महिला के नाम संपत्ति होती है, उसके आर्थिक अधिकार का दायरा बढ़ता है। परिवार में आर्थिक निर्णयों में उसकी भूमिका मजबूत होती है और भविष्य के लिए सुरक्षा का एक स्थायी आधार तैयार होता है।

इसी दृष्टि से महिलाओं के नाम अचल संपत्ति के पंजीयन को सस्ता करना एक ऐसी पहल है, जिसका प्रभाव तत्काल आर्थिक राहत से आगे तक जा सकता है।

परिवारों को भी मिलेगा महिलाओं के नाम संपत्ति कराने का प्रोत्साहन

रजिस्ट्री शुल्क में कमी का एक महत्वपूर्ण प्रभाव यह हो सकता है कि परिवार महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने या हस्तांतरित करने के विकल्प को अधिक सहजता से अपनाएं।

जहां पहले पंजीयन शुल्क लागत का एक बड़ा हिस्सा बन सकता था, वहीं अब आधी दर होने से महिलाओं के नाम संपत्ति दर्ज कराने का वित्तीय बोझ कम होगा।

इससे संपत्ति के स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का वातावरण तैयार हो सकता है।

शर्मिला मिश्रा की बचत बनी नीति के असर की मिसाल

सरकारी योजनाओं और नीतियों की सफलता का सबसे स्पष्ट प्रमाण तब दिखाई देता है, जब उसका लाभ किसी व्यक्ति के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाता है।

रायगढ़ की शर्मिला मिश्रा को मिली करीब 25 हजार रुपये की बचत इसी प्रत्यक्ष प्रभाव का उदाहरण है। एक ओर रजिस्ट्री का खर्च कम हुआ, दूसरी ओर उनके नाम संपत्ति दर्ज होने से आर्थिक अधिकार और सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ।

यह उदाहरण बताता है कि शुल्क में राहत जैसे प्रशासनिक निर्णय भी सामाजिक स्तर पर दूरगामी प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

आर्थिक राहत से आगे—सुरक्षित भविष्य की ओर कदम

महिलाओं के नाम संपत्ति का बढ़ता स्वामित्व उन्हें केवल वर्तमान में आर्थिक रूप से मजबूत नहीं करता, बल्कि भविष्य के लिए भी सुरक्षा प्रदान करता है। संपत्ति संकट के समय सहारा बन सकती है और महिलाओं की वित्तीय आत्मनिर्भरता को मजबूती दे सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल इसी व्यापक सोच के साथ देखी जा सकती है—जहां रजिस्ट्री शुल्क में राहत एक आर्थिक प्रोत्साहन है और महिलाओं के नाम संपत्ति का स्वामित्व उसका दीर्घकालिक सामाजिक परिणाम।

एक फैसले के दो फायदे

पहला—रजिस्ट्री के खर्च में सीधी बचत।
दूसरा—महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मजबूती।

रायगढ़ की शर्मिला मिश्रा की करीब 25 हजार रुपये की बचत इस नीति का तत्काल लाभ दिखाती है, जबकि महिलाओं के नाम बढ़ती संपत्ति उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में दीर्घकालिक कदम साबित हो सकती है।

यही वह बदलाव है, जहां रजिस्ट्री के दस्तावेजों पर दर्ज एक नाम केवल स्वामित्व नहीं, बल्कि महिला के आर्थिक सशक्तीकरण की पहचान भी बन सकता है।

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