बिहान :जिस खेत में कल तक थी मजबूरी, आज वहीं उग रहे हैं आत्मनिर्भरता के सपने

बिहान से मिला सहारा, स्व-सहायता समूह से जुड़ा विश्वास और एक लाख रुपये के ऋण से सुभद्रा मंडल ने शुरू की खीरे की खेती; अब लक्ष्य ‘लखपति दीदी’ बनने का

अंबिकापुर। सुबह की पहली किरण के साथ जब सकालो गांव के खेतों में हरियाली नजर आती है, तो उस हरियाली के बीच सुभद्रा मंडल के लिए सिर्फ खीरे की फसल नहीं दिखती। उन्हें दिखाई देता है—अपने पैरों पर खड़े होने का सपना, परिवार को मजबूत बनाने की उम्मीद और एक बेहतर भविष्य की राह।

अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की सुभद्रा मंडल के लिए यह बदलाव अचानक नहीं आया। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, सीमित संसाधनों के बीच कुछ बेहतर करने की इच्छा और सही अवसर मिलने की कहानी है। कभी पूंजी की कमी खेती के विस्तार में बाधा थी, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उनके सामने संभावनाओं के नए द्वार खुले।

एक लाख रुपये के ऋण ने बदली दिशा

सुभद्रा काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला। उन्होंने इस राशि को किसी तात्कालिक जरूरत में खर्च करने के बजाय अपनी आजीविका को मजबूत करने का निर्णय लिया और एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू कर दी।

यह फैसला उनके लिए सिर्फ खेती शुरू करने का निर्णय नहीं था। यह उस आत्मविश्वास की शुरुआत थी, जिसमें उन्होंने यह भरोसा किया कि यदि अवसर मिले तो मेहनत के बल पर अपनी आर्थिक स्थिति बदली जा सकती है।

आज उनका खेत इसी विश्वास की कहानी कह रहा है।

पहले पूंजी की चिंता, अब आय बढ़ाने की योजना

सुभद्रा बताती हैं कि पहले परिवार की सीमित आमदनी के कारण खेती में पर्याप्त निवेश करना मुश्किल था। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के बाद खेती को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए पूंजी नहीं बचती थी।

मन में इच्छा थी कि खेती को केवल पारंपरिक काम न रहने देकर उसे परिवार की आय का मजबूत आधार बनाया जाए, लेकिन संसाधनों की कमी रास्ता रोक देती थी।

बिहान से जुड़ने के बाद परिस्थितियां बदलीं। स्व-सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिला और सुभद्रा को अपनी योजना को जमीन पर उतारने का अवसर मिला।

सहायता मिली तो आत्मविश्वास भी बढ़ा

सुभद्रा के लिए बिहान की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल ऋण मिलना नहीं है। उनके अनुसार, समूह से जुड़ने के बाद उन्हें यह भरोसा मिला कि वे भी आर्थिक गतिविधि को अपने स्तर पर आगे बढ़ा सकती हैं।

एक एकड़ में शुरू की गई खीरे की खेती अब परिवार की आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। सुभद्रा की योजना है कि खेती से होने वाली आमदनी का उपयोग परिवार की जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की आजीविका गतिविधियों में भी किया जाए, ताकि आय के स्थायी साधन को और मजबूत किया जा सके।

उनका अगला बड़ा सपना है—‘लखपति दीदी’ बनना।

महिला की मेहनत को मिला समूह का साथ

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में स्व-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बिहान के माध्यम से महिलाएं समूहों से जुड़कर बचत, ऋण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों के अवसर प्राप्त कर रही हैं।

कहीं महिलाएं सब्जी उत्पादन कर रही हैं, कहीं पशुपालन और मछली पालन को आय का माध्यम बना रही हैं, तो कहीं कृषि आधारित गतिविधियों के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

सुभद्रा मंडल की कहानी इसी बदलाव का एक जीवंत उदाहरण है—जहां समूह ने साथ दिया, ऋण ने अवसर दिया और मेहनत ने उस अवसर को आगे बढ़ाने का रास्ता बनाया।

‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार

सुभद्रा मंडल ने बिहान से जोड़ने और आजीविका गतिविधि शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उनका कहना है कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी मेहनत को आय के अवसर में बदलने का रास्ता मिला। आर्थिक सहयोग ने उन्हें खेती का विस्तार करने के साथ-साथ अपने भविष्य को लेकर बड़ा सोचने का आत्मविश्वास भी दिया।

एक खेत, एक सपना और बदलाव की बड़ी तस्वीर

सुभद्रा की कहानी भले ही एक गांव और एक परिवार से शुरू होती है, लेकिन इसके मायने इससे कहीं बड़े हैं।

यह कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक सहायता से नहीं आती; अवसर, संस्थागत सहयोग और उसे सफलता में बदलने की इच्छाशक्ति—तीनों मिलकर बदलाव पैदा करते हैं।

एक एकड़ खेत में शुरू हुई खीरे की खेती आज सुभद्रा के लिए उम्मीद की फसल बन चुकी है। कल तक जिस पूंजी की कमी के कारण उनके सपने सीमित थे, आज उसी मेहनत के बल पर वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का सपना देख रही हैं।

और इस सपने का अगला पड़ाव है—‘लखपति दीदी’ बनकर अपनी पहचान बनाना।

सुभद्रा की कहानी उस नए ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर है, जहां खेतों में केवल फसल नहीं उग रही—महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के सपने भी आकार ले रहे हैं।

सम्बन्धित खबरें