भारत के मौलिक दर्शन को मानने वालों का संगठन है संघ : डॉ. कृष्ण गोपाल

काशी | 31 अगस्त 2026|  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के मौलिक दर्शन को मानने वालों का संगठन है, जो अपने सांस्कृतिक अधिष्ठान को सुरक्षित रखते हुए युगानुकूल तकनीक और परिवर्तन को स्वीकार कर समाज संगठन का कार्य कर रहा है।

संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर चौकाघाट स्थित गिरजा देवी सांस्कृतिक संकुल में आयोजित प्रमुखजन संवाद-संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को विश्व के कल्याण का आधार बनने से पहले अपने घर को सुव्यवस्थित करना होगा। उन्होंने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को संघर्ष, परिवर्तन और समाज जागरण की प्रेरक यात्रा बताया।

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्र जीवन के लिए तीन प्रमुख सूत्र दिए—देशभक्ति का जागरण, समाज में आत्मविश्वास का निर्माण और पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप कर्म। उन्होंने कहा कि इन्हीं विचारों के आधार पर संघ ने समाज को संगठित करने का कार्य निरंतर आगे बढ़ाया।

उन्होंने बताया कि आज देशभर में 90 हजार से अधिक शाखाओं के माध्यम से लाखों स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, श्रमिक, वनवासी और सामाजिक समरसता के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। विद्या भारती, भारतीय मजदूर संघ, सेवा भारती और वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठन समाज के विविध वर्गों तक सेवा और संगठन का विस्तार कर रहे हैं।

धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि कर्तव्य का बोध है। मातृधर्म, राजधर्म, जल और वायु के धर्म का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म जीवन के गुण और उत्तरदायित्व दोनों का आधार है, जबकि मतांतरण को धर्म परिवर्तन नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने युवाओं, विशेषकर जेन-ज़ी के संदर्भ में कहा कि हिन्दू परिवारों को नई पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि धर्म, संस्कृति और आत्मीयता के संस्कार सहज रूप से आगे बढ़ सकें। उन्होंने उपभोक्तावादी संस्कृति से सावधान रहने तथा विश्व में बढ़ती असहिष्णुता को समाप्त करने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने की। उन्होंने राष्ट्रधर्म को सर्वोच्च बताते हुए समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं वन्देमातरम् के साथ हुआ।

 

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