नमो दीदी ड्रोन योजना ने खोले आत्मनिर्भरता के नए द्वार

बिलासपुर | 30 अगस्त 2026

कभी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका खेती-किसानी और छोटे घरेलू कामों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन बदलती तकनीक और सरकारी योजनाओं ने इस तस्वीर को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। आज गांव की महिलाएं न केवल आधुनिक तकनीक सीख रही हैं, बल्कि उसे रोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लिख रही हैं। बिलासपुर जिले के मस्तुरी विकासखंड के ग्राम पोड़ी की सीमा वर्मा ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने खेतों में ड्रोन उड़ाकर अपने लिए रोजगार का नया आसमान तैयार किया है।

‘बिहान’ से मिली दिशा, ड्रोन से मिला नया अवसर

सीमा वर्मा ‘बिहान’ योजना से जुड़ी हुई हैं। इसी दौरान उन्हें ‘नमो दीदी ड्रोन योजना’ के तहत ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ड्रोन तकनीक को केवल सीखने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया।

अब सीमा आसपास के किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव करती हैं। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उनसे संपर्क करते हैं और सीमा आधुनिक तकनीक के जरिए कम समय में खेतों में छिड़काव का काम पूरा करती हैं।

यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं है। इसके साथ सीमा के जीवन में रोजगार, आय और आत्मविश्वास—तीनों का विस्तार हुआ है।

खेतों में कम समय में छिड़काव, किसानों को सुविधा

परंपरागत तरीके से खेतों में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव करने में अधिक समय, श्रम और संसाधनों की आवश्यकता होती है। ड्रोन तकनीक ने इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया है। सीमा के लिए यह तकनीक किसानों की मदद करने के साथ-साथ नियमित आय का साधन भी बन गई है।

ड्रोन संचालन के कार्य से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। पहले जहां आय के साधन सीमित थे, वहीं अब तकनीक आधारित इस नए काम ने परिवार की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।

एक काम नहीं, आजीविका के कई रास्ते

सीमा वर्मा की सफलता की खास बात यह भी है कि उन्होंने अपनी आजीविका को केवल ड्रोन संचालन तक सीमित नहीं रखा। वे मशरूम उत्पादन से भी जुड़ी हैं और इसके माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

एक ओर वे किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए कृषि कार्य में सहयोग करती हैं, तो दूसरी ओर मशरूम उत्पादन से अपनी आमदनी बढ़ाती हैं। इस तरह अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को जोड़कर उन्होंने अपने परिवार के लिए आय के कई स्रोत तैयार किए हैं।

तकनीक बनी महिला सशक्तिकरण की ताकत

सीमा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीक और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहतीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाली और आर्थिक रूप से सक्षम भागीदार बन सकती हैं।

ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक से जुड़ने ने सीमा के आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है। अब वे कृषि क्षेत्र में तकनीकी सेवा प्रदान कर रही हैं और अपने कौशल के माध्यम से किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं।

योजनाओं से बदली जिंदगी की दिशा

सीमा वर्मा का कहना है कि ‘बिहान’ योजना और ‘नमो दीदी ड्रोन योजना’ ने उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। उन्होंने इन योजनाओं के माध्यम से मिले अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

सीमा की कहानी केवल एक महिला की आर्थिक सफलता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें ग्रामीण महिला के हाथों में अब केवल परंपरागत काम के औजार नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक की कमान भी है। खेतों के ऊपर उड़ता ड्रोन आज उनके लिए तकनीक का प्रतीक भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और बेहतर भविष्य की उड़ान बन चुका है।

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