वामपंथी संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की टी-शर्ट पर सफेद खोपड़ी - ये सामान्य डिजाइन नहीं है। ये दुनिया का सबसे पुराना धमकी वाला निशान है।

1700 से 1725 तक समुंदर में लुटेरों का राज था। ब्लैक सैम बेलामी, ब्लैकबियर्ड जैसे समुद्री डाकू काले झंडे पर खोपड़ी लगाते थे। इसका मतलब एक ही था - चुपचाप सब दे दो, वरना मार दिए जाओगे। ये झंडा बात करने के लिए नहीं, डराने के लिए था।

1997 में जापान के कार्टूनिस्ट ओड़ा ने इसी खोपड़ी पर एक टोपी रख दी ताकि बच्चे न डरें। नाम रखा - स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स। फिर 28 साल तक ये कार्टून बनकर टी शर्ट, खिलौना, टिफिन पर बिकता रहा। खून के निशान को हंसी-मजाक बना दिया गया।

अगस्त 2025 में इंडोनेशिया में विरोध शुरू हुआ तो यही झंडा उठा लिया गया। नारा दिया - हम देश के नहीं, हम पायरेट हैं। देश का झंडा जला दिया गया।

यहीं से साजिश शुरू होती है। पायरेट का कोई देश नहीं होता, कोई कानून नहीं होता, कोई संविधान नहीं होता। उसका एक ही काम है - अराजकता फैलाना।

जहाँ ये झंडा आता है, वहाँ युवाओं को कहा जाता है - पुलिस दुश्मन है, कानून मत मानो, दुकान लूटना तुम्हारा हक है, आग लगाना क्रांति है।

नेपाल, फिलीपींस, फ्रांस - सब जगह यही हुआ। पहले खोपड़ी वाला झंडा, फिर मुंह पर मास्क, फिर दुकानों में लूट और आग। और बाद में बोल दिया - हम तो बस मीम बना रहे थे।

ये झंडा तुम्हारी पहचान छुपा देता है। खोपड़ी पहनो, चेहरा ढको, तोड़-फोड़ करो और फिर बोल दो - पता नहीं किसने किया।

ये तुम्हें लुटेरा बनना सिखाता है। पायरेट कभी कुछ बनाता नहीं, सिर्फ लूटता है।इसलिए ये सिर्फ टी शर्ट नहीं है। ये धीरे-धीरे दिमाग में डाला जा रहा है कि कानून मजाक है, लूट हक है, और हिंसा ही संविधान है। और यही कार्ल मार्क्स का पुराना सपना था - खूनी क्रांति। जिसे आज वामपंथी पूरा करने में लगे हैं।

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