अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े प्रकरण के बाद जिस प्रकार कुछ राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच चलने के बावजूद अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए सनातन धर्म का लगातार अपमान कर रहे थे और किसी न किसी प्रकार अयोध्या के प्रति हिंदुओं की आस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे, उससे सनातन समाज में क्रोध और निराशा दोनों व्याप्त हो रहे थे।

अब, एक लंबी चयन प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन सिंदूर के नायक सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्ति से हिंदू समाज में भरोसे का नया भाव जगा है।

नए सीईओ जितेंद्र मिश्र

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को मंदिर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना में लगभग 40 वर्षों तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने अपने सैन्य जीवन में लड़ाकू विमान उड़ाकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जनवरी 2025 में उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इससे पहले वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के संचालन के माध्यम से उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई में योगदान दिया था।

जैसे ही जितेंद्र मिश्र के नाम की घोषणा हुई, सोशल मीडिया और टेलीविजन मीडिया में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीर व्यापक रूप से प्रसारित होने लगी। इस तस्वीर में जितेंद्र मिश्र प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी करते दिखाई दे रहे हैं। अब वही जितेंद्र मिश्र अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सीईओ के रूप में मंदिर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। उनका पूरा सार्वजनिक जीवन सैन्य सेवा, अनुशासन और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा रहा है।

चार दशक की सैन्य सेवा का अनुभव

देवरिया की धरती के सुपुत्र जितेंद्र मिश्र को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया था। इससे पूर्व उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक तथा वर्ष 2013 में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स अकादमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में प्रवेश किया था। लगभग 40 वर्ष के अपने सैन्य करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरने का अनुभव अर्जित किया है। नेटफ्लिक्स की ऑपरेशन सफेद सागर में भी जितेंद्र मिश्र के सैन्य जीवन से जुड़ा किरदार दिखाया गया था।

सीईओ की क्या होगी भूमिका?

श्रीराम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी मुख्यतः मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं और उनके प्रभावी संचालन से जुड़ी होगी। इनमें प्रतिदिन के दर्शन का प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, वीआईपी मूवमेंट, पर्वों के दौरान भीड़ नियंत्रण, कर्मचारियों की निगरानी तथा जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल होंगे।

हालांकि, नीति, वित्त और शासन से जुड़े वास्तविक अधिकार महासचिव के पास ही रहेंगे। पूर्व कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरि जी को नया महासचिव बनाया गया है। सीईओ महासचिव को रिपोर्ट करेंगे और सीधे उनके अधीन कार्य करेंगे।

सीईओ की भूमिका मुख्यतः ट्रस्ट द्वारा लिए गए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन की होगी, जबकि नीति निर्धारण और बड़े प्रशासनिक निर्णयों का अधिकार महासचिव के पास रहेगा। महासचिव सीईओ की नियुक्ति, उनके कामकाज की समीक्षा तथा वार्षिक बजट की अनुमति देंगे। ट्रस्ट का प्रत्येक बड़ा निर्णय महासचिव की अनुमति से ही होगा।

इस प्रकार राम मंदिर ट्रस्ट में निर्णय लेने की शक्ति महासचिव के पास और निर्णयों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सीईओ के पास रहेगी।

5,585 आवेदनों के बाद हुआ चयन

सीईओ पद के लिए देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा सेना के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल थे।

मीडिया में चल रहे तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए जब देवरिया निवासी जितेंद्र मिश्र का नाम सामने आया तो अनेक विश्लेषक भी हैरान रह गए। एक लंबे और व्यापक चयन प्रक्रिया के बाद उनकी नियुक्ति यह संकेत देती है कि मंदिर की विशाल और जटिल व्यवस्थाओं के संचालन के लिए अनुभव, अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता दी गई है।

ट्रस्ट में तीन नए सदस्य

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रिक्त पड़े तीन पदों को भी भर दिया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की डा. निर्मला यादव को शामिल किया गया है।

डा. निर्मला यादव लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। उनके शामिल होने से ट्रस्ट में महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ी शिकायत भी दूर हो गई है। वहीं, अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय ने रामलला की ओर से मुकदमे की पैरवी की थी।

नए ट्रस्ट के गठन के बाद चंपत राय जी की वापसी की संभावनाएं लगभग समाप्त मानी जा रही हैं।

नई व्यवस्था से नई उम्मीद

श्रीराम जन्मभूमि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्था और प्रशासन में पारदर्शिता, अनुशासन तथा दक्षता का विशेष महत्व है।

हिन्दू समाज एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की ओर भरोसे से देख रहा है कि जिस प्रकार उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा की उसी प्रकार वह नई भूमिका में हनुमान जी की तरह दिव्य व भव्य श्रीराम मंदिर की सेवा व सुरक्षा करेंगे। राम मंदिर की भव्यता के साथ उसकी व्यवस्था भी उतनी ही उत्कृष्ट हो—यही करोड़ों रामभक्तों की अपेक्षा है। 

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