सनातन धर्म में करवा चौथ (करक चतुर्थी) अमर प्रेम, समर्पण, पवित्रता, पति की दीर्घायु, पारिवारिक समरसता और शक्ति के अपूर्व सामर्थ्य का महाव्रत-महापर्व है। यह महाव्रत चौथ माता अर्थात् आदिशक्ति माता पार्वती को समर्पित है। अतः यह महाव्रत सादगी और पारंपरिक रूप से ही रखा जाना श्रेयस्कर है। परंतु वर्तमान संदर्भ में बॉलीवुड के तथाकथित सेक्युलर निर्देशकों, अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने इस महाव्रत को फिल्मी बनाकर इवेंट बनाने का जो प्रयास किया है, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि वास्तविकता से भी परे है।

करवा चौथ व्रत से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

देवासुर संग्राम में परमपिता ब्रह्मा ने देवताओं की विजय और दीर्घायु के लिए देवियों को इस व्रत का विधान बताया था। सावित्री ने सत्यवान के लिए इस व्रत को रखा और यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा की। भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को अर्जुन के लिए इस व्रत को रखने का वृत्तांत बताया था। स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को इस महान व्रत के माहात्म्य के बारे में बताया है। इसके साथ ही अन्य कथाएँ भी प्रचलित हैं, जिनमें करवा माता एवं वीरावती की कथा भी शामिल हैं।

वर्ष 2026 में करवा चौथ : दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग

वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जा रहा है। इस साल का करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत विशिष्ट और सौभाग्यशाली माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ-साथ लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग, परिघ योग और लक्ष्मीनारायण राजयोग का एक बहुत ही दुर्लभ और महासंयोग बन रहा है। इसके साथ ही इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जो दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने वाला माना जाता है।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस साल अनेक ऐसे ग्रहों के योग बन रहे हैं, जो इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देंगे।

रोहिणी नक्षत्र का संयोग: करवा चौथ व्रत के दिन चंद्रमा रात 11:12 बजे तक अपने सबसे प्रिय रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। शास्त्रों में रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति को आपसी प्रेम की वृद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

लक्ष्मी नारायण योग: 29 अक्टूबर को शुक्रदेव अपनी स्वराशि तुला में उदित होकर बुध के साथ युति बनाएंगे, जिससे सुहाग और वैवाहिक जीवन में सुख-वैभव बढ़ाने वाला लक्ष्मी नारायण योग बनेगा।

बुधादित्य योग: सूर्य और बुध की अनुकूल स्थिति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा, जो व्रती महिलाओं को मान-सम्मान और आरोग्य प्रदान करेगा।

परिघ योग: इस दिन परिघ योग भी रहेगा, जो शत्रुओं पर विजय और पारिवारिक सुरक्षा के लिहाज से शुभ माना जाता है।

करवा चौथ : तिथि और शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि का आरंभ: 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 01:06 बजे से होगा और समापन 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे होगा।

सरगी खाने का शुभ समय: सुबह 04:00 बजे से 05:00 बजे तक शुभ रहेगा।

करवा चौथ व्रत का कुल समय: सुबह 06:31 बजे से रात 08:17 बजे तक रहेगा।

करवा चौथ पूजा का मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से रात 06:56 बजे तक अत्यंत शुभ है।

राहुकाल का ध्यान रखें और दिन के समय रहने वाले राहुकाल में कोई भी शुभ पूजा करने या कथा सुनने से बचें।

देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में चंद्रमा दिखाई देने का समय इससे थोड़ा अलग हो सकता है। अपने नगर के हिसाब से चंद्रमा निकलने का सही समय एक बार अवश्य देख लें। रात 08:17 बजे के बाद, जैसे ही आपके स्थानीय क्षेत्र में चंद्रमा दिखाई दें, महिलाएँ रोहिणी नक्षत्र की उपस्थिति में चंद्रमा को जल और गुड़ से अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण कर सकती हैं।

सरगी और मिट्टी के करवे का महत्त्व

सास माँ आज आत्मीय भाव से बहू को सरगी देती हैं, जो दोनों के रिश्तों को वात्सल्य रस से भर देती है। मिट्टी के करवे (पात्र) का विशेष महत्त्व है। यह करवा देवी और चौथ देवी का प्रतीक है। मिट्टी का करवा पंचतत्त्व का प्रतीक है। मिट्टी को पानी में गलाकर बनाया जाता है, जो पृथ्वी और जल तत्त्व का प्रतीक है। उसे बनाकर धूप और हवा से सुखाया जाता है, जो आकाश और वायु तत्त्व के प्रतीक हैं। फिर आग में तपाकर बनाया जाता है।

मिट्टी के करवे में जल : प्रकृति और परमात्मा का प्रतीक

भारतीय संस्कृति में पानी को ही परब्रह्म माना गया है, क्योंकि जल ही सभी जीवों की उत्पत्ति का केंद्र है। इस तरह मिट्टी के करवे से पानी पिलाकर पति-पत्नी अपने रिश्ते में पंचतत्त्व और परमात्मा, दोनों को साक्षी बनाकर अपने दांपत्य जीवन को सुखी बनाने की कामना करते हैं। आयुर्वेद में भी मिट्टी के बर्तन में पानी पीने को फायदेमंद माना गया है। इस कारण यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी है।

अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के नियम

अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ व्रत के नियम पृथक हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अविवाहित लड़कियों को निर्जला व्रत रखने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि निर्जला व्रत के लिए सरगी की आवश्यकता होती है और अविवाहित लड़कियों को सरगी आदि नहीं मिल पाती है।

करवा चौथ के दिन अविवाहित महिलाओं द्वारा व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा की जाती है। साथ ही माँ करवा की कथा भी होती है। मान्यता है कि जो लड़कियाँ विधि-विधान से व्रत करती हैं, उन्हें माता करवा का आशीर्वाद मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अविवाहित महिलाओं को चाँद को देखकर अर्घ्य नहीं देना चाहिए, बल्कि तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने का नियम केवल विवाहित महिलाओं के लिए होता है।

चंद्रमा दिखाई न देने पर व्रत खोलने के विकल्प

यदि आपके शहर में खराब मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो ऐसी स्थिति में आप अपने किसी परिचित को मोबाइल कॉल कर सकती हैं, जो दूसरे शहर में रहता है। वीडियो कॉल के माध्यम से चंद्र-दर्शन कर अपना व्रत खोल सकती हैं। यदि वीडियो कॉल के माध्यम से व्रत खोलना संभव नहीं है, तो आप जिस दिशा में चंद्रमा उगता है, उस दिशा की ओर मुँह करके व्रत खोल सकती हैं।यदि आकाश में चंद्रमा न दिखे, तो आप भगवान शिव के सिर पर विराजमान चंद्रमा की पूजा करके भी व्रत कर सकती हैं। यदि करवा चौथ के दिन आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो आपको मंदिर में जिस दिशा की ओर एक स्थान रखना होता है, उस दिशा में चंद्रमा निकल रहा होता है।

करवा चौथ की पूजा और व्रत का मूल भाव

भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा का विधान है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। छलनी ने सभी राग-द्वेष छान दिए हैं; अब केवल निर्मल प्रेम ही शेष है। यही करवा चौथ व्रत का मूलाधार है।

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