सामान्यतः, इन शब्दों को समानार्थक समझा जाता है, परंतु इनमें अर्थपरक विभेद है। आदेश न्याय एवं शासन–प्रशासन का शब्द है, जिसे मानने की विवशता रहती है। यह जानना रोचक है कि जिस 'दिश्' धातु से 'दिशा' शब्द की निर्मिति है, उसी से बनने वाले 'देश' शब्द में 'आ' उपसर्ग जुड़कर आदेश(पुं) शब्द बनता है। इससे पता चलता है कि 'आदेश' मूलतः किसी कार्य को करने अथवा दिशा देने के लिए प्रयुक्त होता है। 

ध्यान दें कि जब इसी आदेश के साथ 'अधि' उपसर्ग जुड़ जाता है तो 'अध्यादेश' शब्द बनता है, जो शासन के प्रमुख( देश के राष्ट्रपति एवं राज्यों के राज्यपाल) द्वारा किसी जटिल स्थिति में शासन-व्यवस्था को उचित रीति से चलाने के लिए पारित किया जाता है। किसी आदेश के पारित होने के बाद यदि उस विषय से संबंधित कुछ और आदेश दिया जाए, तो उसे अनुदेश(अनु+दिश्+ घञ् =अनुदेश) कहेंगे। अनुदेश(अनु का अर्थ है पीछे) किसी आदेश के बाद ही जारी हो सकता है। 

आज्ञा(आ+ज्ञा+अङ्+टाप्=आज्ञा) में निहित 'ज्ञा' का अर्थ ज्ञान, जानकारी देने, बताने आदि से है। इस कारण आज्ञा 'आदेश' से लघुतर शब्द है। इसे मानने में उतनी बाध्यता नहीं होती; परंतु श्रद्धा, कर्तव्य, नैतिक जिम्मेदारी का भाव होता है। आज्ञा(स्त्री.) मानने वाले को आज्ञाकारी अथवा आज्ञानुवर्ती कहा जाता है; जबकि अगर यह विशेषण किसी लड़की अथवा महिला के लिए प्रयुक्त हो, तो आज्ञाकारिणी अथवा आज्ञानुवर्तिनी लिखना चाहिए। यह भी स्मरण रहे कि कुछ लोग 'आपकी आज्ञानुसार' लिखते हैं, जो ग़लत प्रयोग है। जब 'अनुसार' जुड़ गया, तो यह पद पुंलिङ्ग हो गया और तब सही प्रयोग होगा– 'आपके आज्ञानुसार'।

माता–पिता या गुरु की आज्ञा आप मानें अथवा न मानें – वे आपका अहित नहीं करेंगे। अस्तु, अगर आपने अपने कार्यालय-अध्यक्ष के किसी आदेश का अनुपालन नहीं किया, तो कार्यालय-ज्ञापन से लेकर दंड तक कुछ भी मिल सकता है। इसी प्रकार, न्यायालय के आदेश का अथवा किसी राज्यादेश का पालन करना बाध्यकारी होता है। ध्यातव्य है कि आज्ञा मानने से मानसिक परितोष होता है, लेकिन आदेश तो मानना ही पड़ता है; आपको वह पसंद हो अथवा न हो। आज्ञा के लिए अनुज्ञा और आज्ञप्ति शब्द का भी प्रयोग होता है, लेकिन स्मरण रहे कि 'अनुज्ञा' शब्द मूल रूप से अनुमति, सहमति अथवा स्वीकृति आदेश के लिए प्रयुक्त होता है। अनुज्ञापन शब्द का प्रयोग आज्ञा अथवा आदेश द्वारा किसी को अधिकृत करने के लिए प्रयुक्त होता है। जो ऐसी कोई 'अनुज्ञा' जारी करता है, उसे अनुज्ञापक कहते हैं।

निदेश(नि+दिश्+घञ्=निदेश) 'आदेश' का ही कार्यालयीय रूप है। सरकारी कामकाज में जब दिशा बताने के साथ-साथ कुछ निश्चित आदेश पारित किए जाते हैं, तो उसे 'निदेश' कहा जाता है। निर्देश(निर् +दिश्+घञ्=निर्देश) में कुछ समझाया बुझाया जाता है अथवा दिशा दी जाती है, लेकिन यह बाध्यकारी नहीं होता। निर्देश का पालन नहीं करने से यह सम्भव है कि स्वत: कुछ नुकसान हो जाए, पर इसकी अवहेलना निदेश की भाँति दंडात्मक नहीं है।

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