सबसे पहले एक प्रश्न : किसी आपराधिक(अपराधिक अशुद्ध है।) घटना के पश्चात् पुलिस किसे गिरिफ़्तार करने का प्रयास करती है : आरोपी को या आरोपित को? स्मरण रहे कि हिंदी में ‘गिरफ़्तार’ भी लिख दिया जाता है, हालाँकि शुद्ध शब्द गिरिफ़्तार है, जो मूलतः फ़ारसी भाषा का विशेषण शब्द है। अब आइए! आरोप शब्द को देखते हैं:–

आरोप– आरोप शब्द का मूल अर्थ है, ऊपर रखना, बोझा लादना, एक वस्तु के गुण को दूसरी वस्तु पर मढ़ना इत्यादि। व्यवहार में, ‘आरोप’ शब्द का अर्थ किसी के बारे में ऐसे शब्द कहना (लादना अर्थ में) जिससे उसकी छवि दूसरी हो जाएगी या बदल जाएगी। व्यवहार में दोषारोपण या इल्ज़ाम लगाने के अर्थ में आरोप शब्द का प्रयोग होता है। किसी व्यक्ति पर चोरी अथवा भ्रष्टाचार का आरोप है तो इसका अर्थ है कि उस पर इसका दोष अथवा इल्ज़ाम लगा है।

आरोपी– जो आरोप लगता है, वह ‘आरोपी’ है। जिसने कहा कि अमुक(फलाँ) व्यक्ति ने उसके घर चोरी की है, वह स्वयं ‘आरोपी’ कहलाएगा।

आरोपित– जिसपर आरोप लगाया जाता है, वह ‘आरोपित’ है। स्मरण रहे कि अज्ञानवश लोग ‘आरोपित’ की जगह ‘आरोपी’ शब्द का प्रयोग कर देते हैं। पुलिस का काम आरोपित को पकड़ना है; जबकि मीडियाकर्मी कई बार प्रयोग करते हैं– “आरोपी गिरिफ़्तार”। पुनश्च : ‘गिरिफ़्तार’ शुद्ध शब्द है; गिरफ़्तार नहीं। 

विशेष : व्युत्पत्ति की दृष्टि से आरोप की धातु 'रुह्' है– [आ+ रुह् + णिच् + घञ्, पुकागम: = आरोप]

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