सबसे पहले एक उदाहरण– ‘अंतिम चेतावनी’ होती है, ‘समाप्त चेतावनी’ नहीं। हाँ किसी बात के साथ अंतिम(आख़िरी) चेतावनी समाप्त(पूरी) हो सकती है।

एक और उदाहरण देखते हैं– किताब पढ़कर, कथा सुनकर या फ़िल्म देखकर हम समाप्त(पूरा) करते हैं, अंत(ख़त्म) नहीं करते। इसे पुनः आरंभ से पढ़ा जा सकता है। हाँ, फ़िल्म में नायक अथवा नायिका का 'अंत'(मृत्यु) अवश्य हो सकता है। जब कहा जाए– “फिल्म के अंत में ऐसा होता है…” तो स्पष्ट समझा जा सकता है कि ‘अंत’ शब्द का प्रयोग, ख़त्म, आख़िरी सिरा अथवा उपसंहार (उप+सम्+हार) के अर्थ में हुआ है। ध्यातव्य है कि जहाँ समापन के अर्थ में ‘अंत’ का प्रयोग होता है, वहाँ दुबारा आरंभ की संभावना नहीं रहती, यथा– ‘उसके जीवन का अंत हो गया।’

अब आइए, इन शब्दों को समझते हैं– 'अंत'(अम्+तन्) शब्द में 'अम्' का अर्थ 'गति' आदि है और 'तन्' धातु तानने, विस्तार, प्रसार, फैलाव आदि का सूचक है। इस तरह, अंत में मूलतः किसी चीज़ के विस्तार की सीमा का बोध है। इसके प्रमुख अर्थ निम्नलिखित हैं– 
1. ख़ात्मा, नाश, मृत्यु  (उदाहरण : राम ने रावण का अंत कर दिया। अंत करने वाले को 'अंतक' कहा जाता है। यहाँ राम रावण के 'अंतक' सिद्ध हुए।
2. निपटारा, अंतिम अवस्था, आख़िरी-सिरा, छोर, सीमा, सरहद
3. निष्कर्ष, परिणाम, अंततोगत्वा, निदान, उपसंहार (उदाहरण : और अंत में, मैं बस इतना कहना चाहूँगा कि.....।)

अंतिम : सबसे बाद, सबके आख़िर में होनेवाला। उदाहरण : अंतिम प्रस्तुति, अंतिम वाक्य, अंतिम कृति, अंतिम वक्ता, अंतिम विदाई इत्यादि।

जानना चाहिए कि 'अंत' से बने एक अव्यय शब्द 'अंततः' में 'अंत' के लगभग सारे अर्थ समाहित हो जाते हैं। 

'समाप्त'(सम्+आप् + क्तिन्) :  जब किसी चीज़ अथवा घटना की पूर्णता होती है अथवा उपसंहार होता है, तो कहते हैं कि यह समाप्त हो गया अथवा इसकी 'समाप्ति' हो गई। जिसने कोई काम पूरा कर लिया है, उसे 'समाप्तिक'(समाप्ति+ठन्) कहते हैं। उदाहरण के लिए– 'समाप्तिक-भाषण' या 'समापक-भाषण' से किसी कार्यक्रम विशेष का 'समापन' होता है। हॉं, अगर यह उस कार्यक्रम का 'अंतिम-भाषण' भी है, तो इसका अर्थ है– इस भाषण के बाद कार्यक्रम में कोई दूसरा भाषण नहीं हुआ। ध्यातव्य है कि जब किसी व्यक्ति के जेब का अंतिम सिक्का भी खर्च हो जाए, तो उसे ख़रीदारी समाप्त करनी ही होगी। 

विशेष : ‘समाप्तशिक्ष’ का अर्थ है–  'जिसने शिक्षा समाप्त कर ली हो', तो ‘समाप्तभूयिष्ठ’ का अर्थ है–  ‘समाप्त होने के क़रीब’।