चुनावों में लगातार हो रही पराजय, वर्तमान में उठाए गए एसआईआर के मुद्दे तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को जनसमर्थन न मिलने से हताश कांग्रेस के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन, जो पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को आघात पहुँचाने का प्रयास करके असफल रहा है, अब सार्वजनिक मंचों से उनके माता-पिता पर अपमानजनक टिप्पणियाँ कर रहा है। एक सामान्य परिवार में जन्मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कठिन श्रम, समर्पण और राष्ट्रचिंतन के बल पर देश का नेतृत्व करने के लिए भारत के नागरिकों द्वारा निर्वाचित किए गए हैं। संपूर्ण विश्व उन्हें अत्यंत सम्मानजनक दृष्टि से देख रहा है। विश्व के 35 देश उन्हें अपना सर्वोच्च सम्मान दे चुके हैं। वे 20 देशों की संसद को भी संबोधित कर चुके हैं।

खरगे का बयान कांग्रेस के लिए बन सकता है सेल्फ गोल

इसके विपरीत, कांग्रेस का नेतृत्व बार-बार पराजित हो रहा है और पार्टी निराशा की गहरी खाई में जा रही है। इसी हताशा के चलते बिहार के एक कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आपा खो बैठे और मोदी के पिता जी को अपशब्द कहे। कुछ ही समय में यह राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया। पटना में खरगे का बयान कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल भी बन सकता है, क्योंकि पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, जिनमें पहले से ही कांग्रेस की विजय के कोई बड़े आसार नहीं हैं। अब भाजपा को बैठे-बिठाए यह मुद्दा मिल गया है। भारत का आम नागरिक आज भी किसी भी पिता का इस प्रकार सार्वजनिक अपमान उचित नहीं मानता। पिता के प्रति सार्वजनिक मंच पर तिरस्कार दिखाने वाले अखिलेश यादव को भी इसका मूल्य चुकाना पड़ा था।

कांग्रेस की भाषा पर विपक्ष के नेताओं ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस राजनीति में अभद्रता की सारी सीमाएँ तोड़ रही है। सपा नेता रामगोपाल यादव और बसपा नेत्री मायावती ने भी कांग्रेस को नसीहत दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी कहा कि “उनसे गलती हो गई है।” पृथ्वीराज ने नेताओं से भाषा की मर्यादा बनाए रखने और राजनीतिक विरोध में शालीनता बरतने की अपील भी की है। जबकि कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी इमरान मसूद ने बार-बार मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को दोहराया तथा कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया ‘एक्स’ हैंडल पर कार्टून के साथ अत्यंत अभद्र तरीके से “बाप भी जायेगा” लिखकर पोस्ट किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर धरना देने वाले उन छात्रों का समर्थन किया था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ कर रहे थे। कांग्रेस का आचरण पूरी तरह अमर्यादित व असंसदीय हो चुका है।

मोदी की लोकप्रियता से बढ़ रही कांग्रेस की खीझ

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नमो घाट पर हुए एयर शो में 20 लाख लोगों का ज्वार उमड़ पड़ा और प्रधानमंत्री के रोड शो में भी लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह सब देखकर कांग्रेस की हताशा बढ़ना स्वाभाविक भी है। कांग्रेस के इतने हंगामों के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ में कोई कमी नहीं हो रही है। इस बात से कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेता खीझ रहे हैं। आज जब कांग्रेस 10 लाख का आह्वान करती है, तब मुश्किल से 20 से 50 हजार लोगों की भीड़ आती है। उसमें 25 प्रतिशत यू-ट्यूबर्स, रीलबाज और तथाकथित कंटेंट राइटर्स होते हैं, जो सोशल मीडिया पर झूठ फैलाते हैं।

भारत में अराजकता फैलने की उम्मीद पाल रहा विपक्ष

अब आम भारतीय भी कांग्रेस के खेल को अच्छी तरह से समझ चुका है। कांग्रेस का पूरा प्रयास है कि जिस प्रकार बांग्लादेश, श्रीलंका व नेपाल में अराजकता से तख्तापलट हुआ तथा वर्तमान में फ्रांस, इटली, स्पेन, अल्बानिया सहित यूरोप के 13 देशों में जो हो रहा है, वैसा ही भारत में भी देखने को मिले। विदेशों में भारत की छवि खराब हो और बस कांग्रेसी युवराज को अवसर मिल जाए। यह खयाली पुलाव पकने वाला नहीं है। यही कारण है कि कांग्रेस अब “मोदी का बाप भी जाएगा” जैसी भाषा बोल रही है।

खरगे के पुराने बयानों से विवादों का सिलसिला

मल्लिकार्जुन खरगे ने इससे पूर्व अप्रैल 2026 में असम विधानसभा चुनाव की एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी को जहरीला साँप कहा था। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनके लिए आतंकवादी शब्द का प्रयोग किया था। अक्टूबर 2024 में कर्नाटक के कलबुर्गी में प्रधानमंत्री मोदी पर प्रहार करते हुए भाजपा को “आतंकवादियों की पार्टी” कहा था। अप्रैल 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों में खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को “विषैला नाग” कहा था। नवंबर 2023 के गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की हर छोटे-बड़े चुनाव में मौजूदगी पर तंज कसते हुए कहा था कि क्या प्रधानमंत्री के रावण की तरह 100 सिर हैं, जो हर जगह मौजूद रहते हैं। वर्ष 2019 के आम चुनाव के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि अगर कांग्रेस 40 से अधिक सीटें प्राप्त कर लेती है, तो क्या प्रधानमंत्री दिल्ली के विजय चौक पर जाकर फाँसी पर लटकेंगे।

प्रधानमंत्री का अपमान और भाजपा की चुनावी सफलता

इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस ने जब-जब प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किया है, उनका आधार और मजबूत हुआ है। गुजरात के 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान श्रीमती सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को “मौत का सौदागर” कहा, जिसके बाद विधानसभा चुनावों में भाजपा को 121 सीटें प्राप्त हुईं और सरकार बनी। गुजरात में तब से लगातार भाजपा की सरकार बनती आ रही है, क्योंकि गुजरात के लोगों ने इस बयान को गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया।2014 में मणिशंकर अय्यर ने नरेंद्र मोदी को “चाय बेचने वाला” तथा “नीच आदमी” बताया और लोकसभा में भाजपा को 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत प्राप्त हो गया। 2019 में “चौकीदार चोर है” कहा गया, तब उन्हें लोकसभा में 300 से अधिक सीटें प्राप्त हो गईं।

बिहार में अपमानजनक टिप्पणियों के बाद एनडीए की महाविजय

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान दरभंगा की रैली में प्रधानमंत्री मोदी की माँ को गाली दी गई और अपमानजनक नारे लगाए गए, जिसके परिणामस्वरूप बिहार में एनडीए की महाविजय हुई। बिहार कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री और उनकी माँ को लेकर एक अपमानजनक एआई वीडियो भी पोस्ट किया गया था। बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 202 सीटें जीत लीं, राजद को 25 और कांग्रेस को मात्र 6 सीटें ही प्राप्त हुईं।

कांग्रेस की राजनीति पर भारी पड़ रही अमर्यादित भाषा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसी न किसी बहाने अपमान करना कांग्रेस और उसके सहयोगियों की आदत-सी बन गई है। स्वयं राहुल गांधी कहते हैं कि देश का युवा एक दिन उन्हें डंडे से पीटेगा। यही कांग्रेस का असली चरित्र बन चुका है। कांग्रेस का यह व्यवहार उसे और उसके सहयोगियों के लिए ही भारी पड़ जाता है।सत्य यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रियता के शिखर पर बने हुए हैं और विपक्ष का कोई भी नेता उनकी लोकप्रियता के सामने दूर-दूर तक नहीं दिखता।

Disclaimer : इस लेख/रचना में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। हर तरह के वाद, विवाद के लिए लेखक व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार हैं।
अपने लेख इस पते पर भेजें :- editatalraag@gmail.com