भारत में सौर ऊर्जा का विकास एक नए युग में प्रवेश कर रहा है

भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) के अनुमोदन के साथ एक बड़ा बढ़ावा मिला है। इस योजना का उद्देश्य ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) के समर्थन वाले 5,000 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर क्षमता का विकास करना है। सौर ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के सबसे मजबूत प्रेरकों में से एक बन गई है। क्षमता, विनिर्माण और उपभोक्ता अपनाने में वृद्धि यह दर्शाती है कि समन्वित नीतिगत समर्थन किस प्रकार एक उभरती तकनीक को मुख्यधारा के ऊर्जा स्रोत में बदल सकता है। यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, आर्थिक विकास को गति देता है, जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाता है, और भारत को एक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेता के रूप में स्थापित करता है।

भारत का सौर उभार

एक दशक पहले, भारत के बिजली मिश्रण में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है। वर्ष 2014 में  लगभग 3 गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून 2026 तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया है। 

यह परिवर्तन नीतिगत समर्थन, अवसंरचना विकास, विनिर्माण विस्तार और नागरिक भागीदारी से प्रेरित है। सौर पार्क, रूफटॉप प्रणाली और सौरीकृत कृषि पंप जैसे पहल देशभर में इसकी तैनाती को तेज कर रही हैं। सौर वृद्धि के लिए नवीनतम प्रमुख पहल नई मंजूर की गई प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) है।

केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems – ESS) के साथ 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) परियोजनाओं का समर्थन करना है। कम से कम दो घंटे (10,000 मेगावाट) की भंडारण क्षमता वाली ESS राज्यों को पीक डिमांड (चरम मांग) प्रबंधन में और सहायता करेगी। मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग करके यह योजना दुर्लभ भू-संसाधनों पर दबाव को कम करेगी। यह एकीकृत ऊर्जा भंडारण के माध्यम से ग्रिड विश्वसनीयता में भी सुधार करेगी। ₹5,070 करोड़ के बजट अनुमान के साथ, इस योजना को वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2030–31 तक लागू किया जाएगा।

यह योजना राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) द्वारा किए गए आकलन पर आधारित है। इस आकलन के अनुसार, भारत के जलाशयों और उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में लगभग 102.18 GWp की फ्लोटिंग सौर क्षमता की संभावना है। इस योजना से  लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में वार्षिक कमी आने की उम्मीद है। यह 16,000–17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित करेगी। साथ ही, यह फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल, मॉड्यूल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा देगी। इस योजना के माध्यम से सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश लाभान्वित होने के पात्र होंगे। इस पहल से भारत की फ्लोटिंग सौर क्षमता वर्तमान लगभग 700 मेगावाट से बढ़कर 5,000 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।

 

 

यह समन्वित गतिशीलता हमारे समक्ष मापने योग्य परिणाम लेकर आई  है। देश ने 2025 में 37 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जिससे यह वार्षिक वृद्धि में संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे निकल गया। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सौर विकास बाजार बनकर भी उभरा है, जो वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

सौर विस्तार का एक दशक

भारत के सौर विस्तार की नींव एक मजबूत नीतिगत ढांचे ने रखी। प्रमुख प्रयासों  में राष्ट्रीय सौर मिशन (2010), सोलर पार्क योजना, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर कार्यक्रम, और प्रतिस्पर्धी बोली शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर बड़े पैमाने पर सौर तैनाती को गति दी।

भारत भर में सौर क्षमता

सौर तैनाती विविध भौगोलिक और जलवायु क्षेत्रों में फैली हुई है। राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र स्थापित क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखते हैं। बड़ी सौर परियोजनाएं 118.79 गीगावाट स्थापित क्षमता का योगदान करती हैं। कुछ प्रमुख बड़ी सौर परियोजनाओं में शामिल हैं भड़ला सोलर पार्क (राजस्थान), पावागड़ा सोलर पार्क (कर्नाटक), और रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (मध्य प्रदेश) । बिजली ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सौर प्रणालियां एक और 27.88 गीगावाट का योगदान करती हैं। शेष क्षमता हाइब्रिड सौर परियोजनाओं और ऑफ-ग्रिड सौर प्रणालियों से आती है। हाइब्रिड परियोजनाएं सौर ऊर्जा को बैटरी भंडारण या अन्य ऊर्जा स्रोतों के साथ जोड़ती हैं, जबकि ऑफ-ग्रिड प्रणालियां उन क्षेत्रों में बिजली प्रदान करती हैं जो ग्रिड से जुड़े नहीं हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें सौर और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई।

  • भारत ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में जोड़ी गई 23.83 गीगावाट की लगभग दोगुनी है।
  • सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2014 में 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक लगभग 172 गीगावाट हो गई।
  • कुल गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है।
  • गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि 55.29 गीगावाट दर्ज की गई।
  • 29 जुलाई 2025 को, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत की बिजली मांग का 51.5% पूरा किया, जो अब तक दर्ज किया गया सबसे अधिक मासिक हिस्सा है।

सौर विस्तार के पीछे की नीतिगत संरचना

एक स्थिर नीतिगत ढांचे, प्रतिस्पर्धी बोली तंत्र, और दीर्घकालिक लक्ष्यों ने बड़े पैमाने पर सौर तैनाती के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद की है। परस्पर सुदृढ़ करने वाले उपायों के एक समूह ने भारत के सौर विस्तार को समर्थन दिया है। इन्हें व्यापक रूप से पांच स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है:

दृष्टि का निर्माण: जलवायु प्रतिबद्धताएं और दीर्घकालिक लक्ष्य

ग्लासगो में COP26 में, भारत ने पंचामृत लक्ष्यों की घोषणा की, जिनमें 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन शामिल है। ये प्रतिबद्धताएं पेरिस समझौते के तहत भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में परिलक्षित हुईं।

इन प्रयासों को पूरक बनाते हुए, मिशन LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) सतत उपभोग को बढ़ावा देता है और नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक प्रथाएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

मांग का निर्माण: राष्ट्रीय मिशन और नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं

भारत की सौर वृद्धि के केंद्र में एक मजबूत और निरंतर मांग का होना रहा है। राष्ट्रीय सौर मिशन ने दीर्घकालिक क्षमता लक्ष्य स्थापित किए और सौर तैनाती को प्रारंभिक गति प्रदान की।

नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं (RPO) बिजली वितरण कंपनियों और अन्य बाध्य संस्थाओं को अपनी बिजली का एक निर्दिष्ट हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से खरीदने की बाध्यता रखती हैं। आरपीओ डेवलपर्स और निवेशकों को दीर्घकालिक बाजार निश्चितता प्रदान करते हैं, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक अपनाने को प्रोत्साहित करते हैं। आरपीओ पथ आगामी 2029-30 तक अधिसूचित किया गया है, जिसमें वर्ष 2026-27 का लक्ष्य 35.95 प्रतिशत निर्धारित है।

मांग उपयोगिताओं और बड़े डेवलपर्स से आगे भी बढ़ी है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना परिवारों को रूफटॉप सौर प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस बीच, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) कृषि क्षेत्र में सौर पंपों को अपनाने और फीडर सौरीकरण को समर्थन दे रहा है। साथ मिलकर, ये पहल सौर ऊर्जा के बाजार का विस्तार कर रही हैं और उपभोक्ताओं, किसानों, व्यवसायों तथा बिजली उपयोगिताओं में भागीदारी को मजबूत कर रही हैं।

लागत में कमी: प्रतिस्पर्धी बोली और टैरिफ खोज

सौर क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक रहा है पिछले दशक में बिजली टैरिफ में गिरावट। यह ई-रिवर्स नीलामी तंत्र के माध्यम से बोली द्वारा प्रेरित था, जिसमें डेवलपर्स सबसे कम टैरिफ पर बिजली आपूर्ति करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।

भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) जैसी खरीद एजेंसियों ने इस पारदर्शी टैरिफ खोज तंत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे अधिक डेवलपर्स ने भाग लिया,  2010 में टैरिफ लगभग ₹18 प्रति यूनिट से घटकर रिकॉर्ड निम्नतम ₹2.44 प्रति यूनिट तक आ गए। यह उल्लेखनीय उपलब्धि 2017 में भड़ला सोलर पार्क नीलामी में हासिल की गई थी। इसने सौर ऊर्जा को अधिक किफायती बनाया और पूरे भारत में इसे अपनाने में तेजी लाई।

टैरिफ में गिरावट ने सौर ऊर्जा को दिन-प्रतिदिन अधिक किफायती बना दिया है। परिणामस्वरूप, भारत विश्व के सबसे कम लागत वाले सौर ऊर्जा बाजारों में से एक बनकर उभरा है। 2025 में, यूटिलिटी-स्केल सौर पीवी की समतुल्य बिजली लागत (LCOE) 35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रही, जो 44 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा के वैश्विक औसत से काफी कम है।

सक्षम बुनियादी संरचना

सरकार ने डेवलपर्स को भूमि और सहायक बुनियादी संरचना तक तत्काल पहुंच प्रदान करने के लिए सोलर पार्क योजना शुरू की। यह योजना शुरुआत में 20 गीगावाट के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी और बाद में 2017 में 40 गीगावाट तक विस्तारित की गई। फरवरी 2026 तक, 39,188 मेगावाट की संयुक्त स्वीकृत क्षमता वाले 54 सोलर पार्क देशभर में स्वीकृत किए जा चुके हैं।

सोलर पार्क कई राज्यों में यूटिलिटी-स्केल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं:

क्र.सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेशपार्कों की संख्यास्वीकृत क्षमता (मेगावाट)
1आंध्र प्रदेश54200
2छत्तीसगढ़1100
3गुजरात712,150
4झारखंड2334
5झारखंड और पश्चिम बंगाल*1310
6कर्नाटक12000
7केरल3255
8मध्य प्रदेश94208
9महाराष्ट्र41,105
10मिजोरम120
11ओडिशा140
12राजस्थान1110,726
13उत्तर प्रदेश83,740
 कुल5439,188

* इसमें झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैला एक अंतर-राज्यीय फ्लोटिंग सोलर पार्क शामिल है

इस योजना ने भारत के कुछ सबसे प्रमुख सोलर पार्कों के विकास को संभव बनाया है।

भड़ला सोलर पार्क: रेगिस्तानी भूभाग से स्वच्छ ऊर्जा केंद्र तक

राजस्थान के शुष्क भड़ला क्षेत्र में स्थित, इस पार्क ने बंजर भूमि के विशाल हिस्सों को विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा परिसरों में से एक में बदल दिया है। यह विकास कार्य 2015 में सोलर पार्क योजना के तहत शुरू हुआ और चरणबद्ध रूप से 2020 तक पूरा हुआ।

लगभग 5,700 हेक्टेयर (56 वर्ग किमी.) में फैले इस पार्क की स्थापित क्षमता 2,245 मेगावाट है। इस क्षेत्र में उच्च सौर विकिरण, कम वर्षा और विरल वनस्पति इसे बड़े पैमाने पर सौर उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

अपने आकार से परे, भड़ला सोलर पार्क मॉडल को व्यवहार में दर्शाता है। भूमि तैयारी और पारेषण सुविधाओं सहित सामान्य अवसंरचना ने त्वरित परियोजना विकास को सक्षम बनाया और महत्वपूर्ण निजी निवेश को आकर्षित किया। पार्क में प्रतिस्पर्धी बोली ने भी भारत के कुछ सबसे कम सौर टैरिफ में योगदान दिया, जिससे सौर ऊर्जा को अधिक किफायती बनाने में मदद मिली।

सोलर पार्क योजना का समर्थन करते हुए, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) कार्यक्रम का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा-समृद्ध क्षेत्रों से मांग केंद्रों तक बिजली के हस्तांतरण को सुगम बनाना है। यह पहल पारेषण नेटवर्क को मजबूत करती है और बिजली ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के निर्बाध एकीकरण का समर्थन करती है।

फरवरी 2026 तक, इस कार्यक्रम ने सुदृढ़ पारेषण नेटवर्क के माध्यम से 24,567.8 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सक्षम बनाया है। दस राज्यों में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजनाओं की योजना लगभग 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी का समर्थन करने के लिए बनाई गई है। ये परियोजनाएं राष्ट्रीय ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को भी मजबूत करेंगी।

विनिर्माण को समर्थन

सरकार ने घरेलू सौर विनिर्माण को मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने के लिए उपाय शुरू किए हैं।

उच्च-दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना

वर्ष 2021 में ₹4,500 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ शुरू की गई, उच्च-दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI योजना को 2022 में अतिरिक्त ₹19,500 करोड़ के साथ विस्तारित किया गया। यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है, आयात निर्भरता कम करती है, और सौर मूल्य श्रृंखला में मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करती है। अक्टूबर 2024 तक, इस योजना ने लगभग ₹35,000 करोड़ का निवेश आकर्षित किया था। इसने लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी दिया था।

अनुमोदित मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM),

वर्ष 2019 में शुरू किया गया, ALMM सौर पीवी मॉड्यूल और सेल के लिए एक गुणवत्तापूर्ण आश्वासन ढांचा है। यह सुनिश्चित करता है कि पात्र परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले सौर उपकरण निर्दिष्ट गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों को पूरा करें। केवल अनुमोदित सूचियों में शामिल निर्माता और मॉडल ही निर्दिष्ट सरकार-समर्थित और प्रतिस्पर्धी रूप से बोली लगाई गई सौर परियोजनाओं के लिए पात्र हैं। यह ढांचा अनुमोदित उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करके घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा देता है।

साथ मिलकर, PLI योजना और ALMM ने भारत के घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है। इन्होंने सौर तैनाती के तीव्र विस्तार को सक्षम बनाते हुए अधिक आत्मनिर्भरता का समर्थन किया है। यह ढांचा अनुमोदित सौर उपकरणों के उपयोग को सुनिश्चित करके उपभोक्ताओं और परियोजना डेवलपर्स को अधिक विश्वास भी प्रदान करता है।

हर घर और खेत तक सौर ऊर्जा पहुंचाना

भारत का सौर परिवर्तन बड़े पैमाने के बिजली संयंत्रों से आगे भी फैला है। परिवारों और किसानों के लिए समर्पित योजनाओं के माध्यम से, सौर ऊर्जा पहुंच में सुधार, बिजली लागत में कमी, और नए आजीविका अवसर सृजित कर रही है।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना

13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई, पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना देशभर के घरों तक सीधे रूफटॉप सौर लाभ पहुंचाती है। यह विश्व का सबसे बड़ा घरेलू रूफटॉप सौर कार्यक्रम है। पात्र परिवारों को रूफटॉप सौर स्थापना के लिए सब्सिडी मिलती है, जबकि जमानत-मुक्त ऋण अपनाने की सुविधा देते हैं। यह योजना एक समर्पित राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से क्रियान्वित की जाती है, जो निर्बाध पंजीकरण, स्थापना और सब्सिडी वितरण को सक्षम बनाती है।

      प्रमुख उपलब्धियां

  •  जून 2026 तक 43 लाख परिवारों को सौरीकृत किया जा चुका है।
  • दिसंबर 2025 तक ₹14,771.82 करोड़  केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में वितरित किए गए।
  • 09 दिसंबर 2025 तक 7.7 लाख से अधिक परिवारों को शून्य बिजली बिल प्राप्त हुए।

यह योजना परिवारों को अपनी स्वयं की बिजली उत्पन्न करने में सक्षम बनाती है। यह बिजली बिलों को कम करती है और रूफटॉप सौर को अपनाने को बढ़ावा देती है। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला है, जिसमें विश्व बैंक ने भारत में आवासीय रूफटॉप सौर को बढ़ाने के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दी है।

ऊंचे बिजली बिलों से सौर बचत तक

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के बारे में जानने के बाद, ग्वालियर के जावर कॉलोनी निवासी सुधांशु दुबे ने रूफटॉप सौर अपनाया।

स्थापना और सब्सिडी प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हुई, और सब्सिडी राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा की गई। एक वर्ष से अधिक समय से, इसके लाभ हर महीने दिखाई दे रहे हैं। पहले, उनके घर का बिजली बिल अक्सर ₹10,000 से अधिक होता था; आज यह लगभग नगण्य है। रूफटॉप सौर प्रणाली विश्वसनीय रूप से बिजली उत्पन्न करती रहती है, जिससे परिवार को अपनी बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने और मासिक खर्च कम करने में मदद मिलती है।

सुधांशु के लिए, इस योजना ने धूप को बचत में बदल दिया है। उनका अनुभव दर्शाता है कि किस तरह पीएम सूर्य घर देशभर के परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और अपनी बिजली लागत पर अधिक नियंत्रण पाने में सक्षम बना रही है।

प्रधानमंत्री-किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम)

2019 में शुरू की गई, पीएम-कुसुम का उद्देश्य कृषि में सौर ऊर्जा के उपयोग का विस्तार करना है। यह योजना विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों, स्टैंडअलोन सौर कृषि पंपों, और ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों के सौरीकरण की स्थापना का समर्थन करती है। इसका उद्देश्य सिंचाई के लिए विश्वसनीय दिन के समय बिजली प्रदान करना, डीजल पर निर्भरता कम करना, और किसानों के लिए आय के अवसर बढ़ाना है।

पीएम-कुसुम किसानों को सिंचाई और बिजली उत्पादन दोनों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम बनाती है। इस योजना के तहत, किसान सिंचाई के लिए सौर पंप लगाते हैं और जहां पात्र हों, वहां अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनियों को बेचते हैं। यह योजना 2026-27 तक लगभग 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ने पर केंद्रित है, जिसके लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता ₹34,422 करोड़ है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • लगभग 11.49 लाख ऑफ-ग्रिड सौर पंप कृषि उपयोग के लिए स्थापित किए गए।
  • इससे अधिक 15.89 लाख कृषि पंप फीडर-स्तरीय सौरीकरण के माध्यम से कवर किए गए हैं।
  • लगभग 1,726 मेगावाट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता किसानों की भूमि पर चालू की गई।
  • इससे अधिक 21.77 लाख किसानों को देशभर में लाभ मिला।

दोनों योजनाएं भारत के वितरित सौर ऊर्जा परिदृश्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरी हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में, वितरित सौर समाधानों ने वर्ष के दौरान जोड़ी गई 16.3 गीगावाट अर्थात 36% का योगदान दिया, जो 44.61 गीगावाट सौर क्षमता का हिस्सा है। इसमें से 7.6 गीगावाट पीएम-कुसुम से और 8.7 गीगावाट रूफटॉप सौर से आया।

वैश्विक सौर सहयोग में भारत का बढ़ता नेतृत्व

सौर ऊर्जा में भारत का नेतृत्व अपनी सीमाओं से परे भी फैला है। देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान, और क्षमता निर्माण को मजबूत कर रहा है।

  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में पेरिस में COP21 में भारत और फ्रांस द्वारा सह-स्थापित, ISA वैश्विक सौर सहयोग के लिए एक प्रमुख मंच बनकर उभरा है। यह गठबंधन मालदीव, ग्रीस, जर्मनी, इटली, भूटान, लक्जमबर्ग और अर्जेंटीना सहित देशों को सौर तैनाती में तेजी लाने और ज्ञान व प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए एक साथ लाता है। ISA सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित हुआ है।
  • वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG): 2018 में भारत द्वारा प्रस्तावित, OSOWOG एक परस्पर जुड़े वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा नेटवर्क की परिकल्पना है। इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए, भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 2021 में COP26 में ग्रीन ग्रिड्स इनिशिएटिव–वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (GGI–OSOWOG) शुरू किया। इस पहल को ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका, और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। यह परस्पर जुड़े बिजली ग्रिडों के माध्यम से सीमा-पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देती है, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में तेजी लाती है।

ISA और अन्य साझेदारियों के माध्यम से, भारत ने वैश्विक दक्षिण में नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है। अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान, भारत ने 2030 तक वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने पर सहमति बनाने में भी मदद की।

आगे की राह

सौर बाजार में भारत की उपलब्धियां निरंतर नीतिगत समर्थन, बढ़ते विनिर्माण, मजबूत अवसंरचना, और बढ़ती जन भागीदारी को दर्शाती हैं। जैसे-जैसे भारत अपनी पंचामृत प्रतिबद्धताओं और 2070 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है, सौर ऊर्जा एक प्रमुख स्तंभ बनी रहेगी। यह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाना जारी रखेगी।

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