गीता मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

‘संघ प्रार्थना – गीता के परिप्रेक्ष्य में’ पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली। 4 ऑगस्ट 2026|

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने ‘संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में’ पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में भारतीय चिंतन परंपरा, गीता के सार्वकालिक संदेश और राष्ट्रजीवन में प्रार्थना के महत्त्व पर विषय रखा। उन्होंने कहा कि गीता ने विश्व के सामने एक नवीन प्रकार का दर्शन प्रस्तुत किया है। गीता मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है। लेखक ने कुछ पंक्तियों के माध्यम से उस भाव को जागृत करने का प्रयास किया है, जिसकी आज आवश्यकता है। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह का निवारण किया था, उसी प्रकार यह पुस्तक स्वयंसेवकों के मन में कर्तव्य और राष्ट्रभाव को जागृत करने का कार्य करेगी।

सुरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. मार्कंडेय आहूजा की पुस्तक ‘संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में’ का लोकार्पण कार्यक्रम विचार विनिमय न्यास सभागार, केशव कुंज, झंडेवाला में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी मुख्य वक्ता रहे, गीता मनीषी एवं जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जी ने आशीर्वचन प्रदान किया।

स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जी ने कहा कि संघ की प्रार्थना का मूल भाव गीता के संदेश से ही प्रेरित है और उसका उद्देश्य मन पर पड़े अज्ञान के आवरण को दूर करना है। उन्होंने इस संदर्भ में सूर्य और बादलों का उदाहरण देते हुए कहा कि सत्य सदैव विद्यमान रहता है, आवश्यकता केवल उसके आवरण को हटाने की होती है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से सामूहिक प्रार्थना कराई तथा लेखक और प्रकाशक को शुभकामनाएँ दीं।

पुस्तक के लेखक डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया और उसके मूल उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ प्रार्थना केवल कुछ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि वह भारतीय जीवन-दृष्टि, राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक मूल्यों का सजीव घोष है। पुस्तक में भगवद्गीता के आलोक में संघ प्रार्थना के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत में सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सुरुचि प्रकाशन की साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देशभर के 150 से अधिक पुस्तक-विक्रय केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा विभिन्न विषयों पर आधारित 600 से अधिक शीर्षक पाठकों के लिए उपलब्ध हैं।

सुरुचि प्रकाशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकुर पाठक ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संपूर्ण बागड़ी ने किया तथा वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ समारोह का समापन हुआ।

 


 

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