सबसे पहले अंतर समझने का सूत्र— रूप या चित्र अलग हो तो ‘विचित्र’, गुण या स्वभाव अलग हो तो ‘विलक्षण’, घटना या स्थिति अपेक्षा से बिलकुल परे हो तो ‘अद्भुत’ और जिसका कोई जोड़ न हो, वह बेजोड़। अब आइए, इन शब्दों को समझते हैं– 

विचित्र में चित्र से पहले ‘वि’ उपसर्ग है। ‘वि’ उपसर्ग किसी वस्तु के सामान्य रूप से अलग होने, भिन्नता, पृथक्करण या व्यतिक्रम का बोध कराता है। इसलिए विचित्र उस वस्तु, आकृति, दृश्य या रूप के लिए कहा जाता है, जो सामान्य की अपेक्षा बिल्कुल अलग हो और जिसे देखकर आश्चर्य उत्पन्न हो। उदाहण : विचित्र कपड़े, विचित्र आकृति या विचित्र तमाशा इत्यादि। वाक्य में प्रयोग : वहाँ का नज़ारा बड़ा विचित्र था; कल मॉल में मैंने एक विचित्र बात देखी; रात में वहाँ एक विचित्र आकृति दिखाई दी इत्यादि।

विलक्षण में ‘लक्षण’ शब्द है। लक्षण का अर्थ – चिह्न, विशेषता, पहचान, आदत, प्रवृत्ति, स्वभाव या विशेष गुण, खूबी इत्यादि है। इसलिए विलक्षण का प्रयोग रूप-रंग के लिए नहीं, बल्कि ऐसे गुण या व्यवहार के लिए होता है, जो सामान्य से हटकर हो। यदि किसी का स्वभाव, प्रतिभा या कार्यशैली सबसे अलग हो, तो वह विलक्षण कहलाता है। जैसे— उनका व्यवहार विलक्षण है या वह विलक्षण प्रतिभा का धनी है। 

ध्यान रहे कि विलक्षण से मिलता-जुलता एक शब्द है ‘विचक्षण’, जिसका अर्थ है―जो स्पष्ट देख ले, अर्थात् स्पष्टदर्शी, बुद्धिमान्, योग्य, विशेषज्ञ इत्यादि। इसमें ‘चक्ष्’ धातु है, जिससे चक्षु(आँख) शब्द की व्युत्पत्ति है।

बेजोड़ : जिसका कोई जोड़ न हो, जो अनोखा या अनूठा हो उसके लिए ‘बेजोड़’ विशेषण का प्रयोग किया जाता है।

अद्भुत में ‘भू’ धातु है, जिसका अर्थ है–होना। जो सामान्यतः होने की अपेक्षा न हो, किंतु घटित हो जाए, वह अद्भुत है। अर्थात् ऐसी घटना जो असंभव या अत्यंत असामान्य प्रतीत हो, उसके लिए अद्भुत शब्द का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण— रेगिस्तान में मूसलाधार वर्षा होना सचमुच एक अद्भुत घटना है; वह फ़िल्म सच में अद्भुत है; कल मेरे साथ एक अद्भुत बात हुई इत्यादि।