इस वक्‍त विश्‍व के अधिकांश देश व्यापारिक अनिश्चितताओं, युद्धों और सप्लाई चेन संकटों से जूझ रहे हैं, किंतु इन सभी के बीच भारत की निर्यात गाथा आज कुछ अलग की कहानी कह रही है। मध्य पूर्व में तनाव, समुद्री मार्गों पर खतरे और बढ़ती लागत के बावजूद भारत का निर्यात क्षेत्र अपने विकास की नई इबारत लिख रहा है। वस्‍तुत: इससे स्‍पष्‍ट है कि भारत आज वैश्विक चुनौतियों के बीच अवसर तलाशना जानता है।

यह सर्वविदित है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण से अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है और लाल सागर जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में आई बाधाओं ने व्यापार की लागत और समय दोनों को ही बढ़ा दिया है। जहाज अब लंबे और जोखिम भरे रास्तों से गुजर रहे हैं, जिससे बीमा प्रीमियम और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ गए हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में जहां कई देशों के निर्यात ठहराव का शिकार हो रहे हैं, वहीं भारत ने उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन करना जारी रखा है। 

दरअसल,  इससे जुड़े ताजा आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2026 में भारत का कुल निर्यात सालाना आधार पर लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 76.13 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यदि हम मर्चेंडाइज यानी वस्तु निर्यात पर नजर डालें, तो जरूर फरवरी में इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई और यह 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया। लेकिन यह गिरावट निराशा का कारण इसलिए नहीं रहा है, क्‍योंकि यह वैश्विक परिस्थितियों का प्रतिबिंब है। वहीं, फरवरी 2026 में सेवाओं का निर्यात लगभग 39.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले शानदार वृद्धि को दर्शाता है। आईटी, वित्तीय सेवाएं, कंसल्टिंग और डिजिटल सेवाओं ने भारत को एक नई पहचान दी है। यही कारण है कि वस्तु निर्यात में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल निर्यात मजबूत बना हुआ है।

भारत की संपूर्ण व्यापक तस्वीर बता रही है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच भारत का कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं मिलाकर) लगभग 790.86 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 747.58 अरब डॉलर से 5.8 प्रतिशत अधिक है। ऐसे समय (खाड़ी युद्ध संकट) में यह वृद्धि भारत की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक सोच को दर्शाती है। भारत की इस सफलता के पीछे कई सेक्टर हैं, जिन्होंने मुश्किल वक्त में भी शानदार प्रदर्शन किया है। इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, रत्न और आभूषण, रेडीमेड गारमेंट्स, कॉटन यार्न, चावल और समुद्री उत्पाद। वस्‍तुत: इन सभी क्षेत्रों ने मिलकर निर्यात को गति दी है।

उदाहरण के तौर पर, इंजीनियरिंग सामान का निर्यात फरवरी 2026 में 12.90 प्रतिशत बढ़कर 10.36 अरब डॉलर हो गया। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ा। वहीं, मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 22 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही यह निर्यात यह भी बता रहा है कि भारत अब सिर्फ पारंपरिक निर्यात तक सीमित नहीं रहा है, वह विविध और उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। भारत के निर्यात बाजारों की विविधता आज उसके लिए ताकत बनकर उभरी है। 

इस मामले में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, सऊदी अरब, बांग्लादेश, सिंगापुर और हांगकांग जैसे बाजारों में भारत की मजबूत मौजूदगी यह दिखाती है कि देश ने वैश्विक स्तर पर संतुलित और व्यापक व्यापारिक नेटवर्क तैयार किया है। वस्‍तुत: मध्य पूर्व में संभावित गिरावट की भरपाई के लिए भारत अन्य बाजारों; जैसे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रहा है। यह कदम भारत की दूरदर्शी व्यापार नीति को दर्शाता है।

एक और बड़ा बदलाव भारत की ऊर्जा रणनीति में देखने को मिला है। पहले जहां भारत का लगभग आधा ऊर्जा आयात होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर था, वहीं अब देश ने अपने स्रोतों में विविधता ला दी है। रूस समेत लगभग 40 देशों से ऊर्जा आयात करने की क्षमता ने भारत को वैश्विक संकटों के प्रति अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया है। इस का परिणाम यह हुआ है कि मौजूदा तनाव के बावजूद भारत में ऊर्जा संकट जैसी स्थिति नहीं बनी। तेल भंडार और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन ने देश को स्थिर बनाए रखा है, जिसका सकारात्मक असर निर्यात क्षेत्र पर भी पड़ा है। 

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (एफआईईओ) भी आज इसलिए यही कह रहा है कि भारत का निर्यात क्षेत्र लगातार मजबूती दिखा रहा है और इसका श्रेय नए बाजारों में विस्तार और प्रमुख क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन को जाता है। उद्योग संगठन ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया भी है कि भारत का कुल निर्यात सालाना आधार पर लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 76.13 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इंजीनियरिंग उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, केमिकल्स, रेडीमेड गारमेंट्स, कॉटन यार्न और फैब्रिक, चावल और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों ने निर्यात में अच्छा योगदान दिया है।   

ऐसे में कहना यही होगा कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का निर्यात क्षेत्र एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। जहां खाड़ी युद्ध की चुनौतियों के बीच कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं, वहीं भारत ने यह साबित किया है कि मजबूत नीतियों, विविध बाजार रणनीति और लचीले आर्थिक ढांचे के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।