अनुभव, अनुभूति, अनुकूल और अनुरूप : भाषा की पाठशाला
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'अनुभव' :  जब कुछ होता है, उसके बाद जो होता है, वह 'अनुभव' है। 'अनु' उपसर्ग का अर्थ है– पीछे और ‘भू’ धातु से बने 'भव' का अर्थ है– होना, घटित होना। इसी अर्थ में कहते हैं कि कुछ होगा तो 'अनुभव' अवश्य होगा। यह उर्दू के 'तजुर्बा' का पर्याय है। प्रयोग में ‘अनुभव’ जानकारी अथवा बोध का पर्याय है।

'अनुभूति’ : यह भी अनुभव की भाँति ‘अनुभू’ का विकारी रूप है। अनुभव कुछ होने के बाद होता है, जबकि 'अनुभूति' अथवा फीलिंग तत्क्षण होती है, होने के तुरंत बाद होती है। डर हो, क्रोध हो, गर्म हो, शीतल हो अथवा ऐसा कुछ भी हो, अनुभूति उसी क्षण होती है। ध्यातव्य है कि अनुभूति सदा वैयक्तिक होती है; यह सामूहिक अथवा सामाजिक नहीं होती। यह एहसास जैसा है। 

अनुभव दीर्घकालिक होता है, परंतु ‘अनुभूति’ का प्रभाव सामान्यतः क्षणिक अथवा अल्पकालिक होता है। यहाँ ध्यान दें कि 'क्षणिक', 'क्षण' आदि शब्दों के मूल में 'क्षण्' है, जिसका मूल अर्थ है– तोड़ना, टुकड़े-टुकड़े करना, क्षति पहुँचाना। 'क्षणिक'(क्षण्+ठन् अथवा क्षण् + इक))  शब्द पर ध्यान दें, तो इसमें क्षति का अथवा टूटने का भाव स्पष्ट दिखाई देता है। जो प्रतिपल टूटता है, वही तो 'क्षणिक' है। 

यह जानना रोचक है कि अनुभव में जो 'भव' है अथवा धातु 'भू' है, उस 'भू' से ही 'प्रभु' शब्द की व्युत्पत्ति है। 'भू' का अर्थ होना है, घटित होना है, तो प्राकट्य और प्रकाश भी है। 'प्र' उपसर्ग का अर्थ विशेष है। इस तरह 'प्रभु' शब्द के दो अर्थ निकलते हैं– विशेष रूप से होना और विशिष्ट प्रकाश अथवा प्राकट्य।

अनुकूल : 'कूल' का अर्थ 'नदी-तट' अथवा 'किनारा' है। 'अनु' उपसर्ग का अर्थ पीछे है, तो साथ-साथ भी है। इस तरह 'अनुकूल' का शाब्दिक अर्थ हुआ— किसी तट अथवा किनारे पर साथ होना। जो हमारे निर्णय, हमारी इच्छा, हमारी सोच के साथ है, वह अनुकूल है, जो विपरीत तट अथवा सिरे पर है, वह प्रतिकूल है। 

'अनुरूप' का अर्थ है– जो रूप-रंग, आकार-प्रकार, गुण-दोष में साथ हो अथवा एक जैसा हो। उदाहरण के लिए, 'यह पद आपके अनुरूप है' का अर्थ हुआ– 'आपकी योग्यता के अनुसार है; आपकी प्रवृत्ति एवं आपके गुण-दोषों को देखते हुए आपके लिए ठीक है।'

विशेष : यह आवश्यक नहीं कि जो अनुकूल हो वह अनुरूप भी हो। भोजन स्वास्थ्य के अनुकूल है तो स्वास्थ्य अच्छा होगा, चाहे आपके मन के अनुरूप हो अथवा न हो। उदाहरण के लिए– संभव है कि उबला हुआ भोजन अथवा कोई फल आपके मन के अनुरूप नहीं है अर्थात् आकार-प्रकार से आपको जँच नहीं रहा है; परंतु हो सकता है कि यह मौसम एवं स्वास्थ्य के अनुकूल हो।