शुरुआती दिनों में मुझे बिजनेस खड़ा करने का सबसे बड़ा सबक एक बड़ी deal के हाथ से निकल जाने पर मिला, और वो था – delegation (काम सौंपने) का महत्व, और ऐसा न करने का नुकसान।

सरल शब्दों में कहें तो - "खुद सब कुछ करने के बजाय, किसी काम के लिए सही व्यक्ति को चुनकर उसे जिम्मेदारी देना और उसपर भरोसा करना ही डेलिगेशन है।"

मैं शुरुआती दिनों में अपने सारे काम खुद ही संभालता था - एक 'one man army' की तरह। 

मेरी सुबह buyers को फोन करने में बीतती थी, दोपहर suppliers के साथ, और शामें बैंक में। मुझे लगता था कि हर काम खुद से करना ही सफलता का एकमात्र रास्ता है, भले ही उसमें दिन का हर एक मिनट लग जाए।

लेकिन फिर एक दिन, सिर्फ एक form समय पर न भर पाने की वजह से एक बहुत बड़ी deal मेरे हाथ से निकल गई। मैं अंदर से टूट गया। तब समझ आया कि भले ही मैं दिन-रात एक कर रहा था, पर मेरा तरीका गलत था। 

और फिर मैंने पहली बार एक 'मुंशी' को hire किया। 

मुझे लगता है कि हर leader को खुद से एक सवाल जरूर पूछना चाहिए - मेरे एक घंटे की कीमत क्या है? अगर उस एक घंटे का काम कोई और कर सकता है, तो उसे hire कीजिए। और अपना समय वहां लगाइए जहां उसकी असली कीमत है – बड़े सपनों को पूरा करने में।

Disclaimer : इस लेख/रचना में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। हर तरह के वाद, विवाद के लिए लेखक व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार हैं।